अधूरा प्यार


💔अधूरा प्यार- जिसे हम चाह के भी पूरा नहीं कर पाते।

वो प्यार जो पूरा होकर ही यादगार नहीं बनता, कभी-कभी अधूरा रह जाना ही उसे और गहरा बना देता है। अधूरा प्यार वह कहानी है जो पूरी नहीं होती, लेकिन दिल में हमेशा के लिए बस जाती है।

हर अधूरा प्यार किसी न किसी खूबसूरत शुरुआत से जुड़ा होता है। बातें, एक-दूसरे को देखने के लिए घंटों इंतेज़ार करना,उसकी बेमतलब सी बातों पे भी हंसना,छोटे-छोटे पल—सब कुछ ऐसा लगता है जैसे दुनिया वहीं रुक गई हो। उस समय सबकुछ बहुत प्यारा - प्यारा सा लगने लगता है।

समय के साथ हालात बदलते हैं। कभी जिम्मेदारियां , कभी परिवार, कभी गलतफहमियां—और कभी बस वक्त की कमी। धीरे-धीरे बातें कम हो जाती हैं और दूरी बढ़ने लगती है,दिलों में प्यार की कमी आने लगती है,हम चिड़चिड़े से होने लग जाते हैं,हम समझ नहीं आता कि हम सही कर रहे या गलत?

अधूरा प्यार अक्सर किसी बड़े झगड़े से खत्म नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। एक दिन अचानक एहसास होता है कि अब सब कुछ पहले जैसा नहीं रहा। और सबसे मुश्किल बात—कोई “अलविदा” भी नहीं होता।कभी कभी हमें खुद को समझा लेना ही बेहतर लगने लगता है,हमें लगने लगता है कि हम जिस रस्ते पे है वो अभी तो हमे खुशी दे रही है लेकिन भविष्य में जरूरी नहीं कि वो हमें यही खुशी दे।

वो चैट्स, वो मुलाकातें, वो गाने—सब कुछ समय के साथ और भी ज़्यादा याद आने लगता है। अधूरा प्यार भूलाया नहीं जाता, बस उसके साथ जीना सीख लिया जाता है।

हर अधूरी कहानी दर्द देती है, लेकिन कुछ सिखाकर भी जाती है। यह सिखाती है कि रिश्तों में सिर्फ प्यार ही नहीं, समझ और समय भी जरूरी होता है।
अधूरा प्यार खत्म नहीं होता,उसे मजबूरियां खत्म होने पे मजबूर करती हैं, अधूरा प्यार बस एक याद बनके रह जाता है जो दिल के किसी कोने में हमेशा जिंदा रहती है।इंसान जिसे चाह के भी दिल से निकाल नहीं पाता।
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